मैं सत्तर घाट पुल हूं।मै ठीक हूं सलामत हूं।मुझे बेवफा ना कहो।सत्तर घाट की सत्तर कहानी।राजनीति चमकाने की जल्दीबाजी ने बदनाम कर दिया।

Share on facebook
Share on twitter
Share on whatsapp
Share on linkedin
Share on telegram

पटना:-ज्यों ज्यों बिहार चुनाव नजदीक आता जा रहा है राजनीतिक दलों की सक्रियता भी बढ़ती जा रही हैं यह सक्रियता किसी सकारात्मकता कि तरफ नहीं है बल्कि राजनीति के लिए एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का है चाहें उस आरोप प्रत्यारोप में कोई तथ्य हो ना हो।इसिका एक ताजा उदाहरण है गोपालगंज को मोतिहारी से जोड़ने वाला सत्तर घाट पुल।

 

बिहार के राजनीति में अपना रोटी सेकने के लिए सब राजनीतिक दल जैसे तेजस्वी यादव पप्पू यादव पुष्पम प्रिया चौधरी जैसे दलों के नेताओं ने गोपालगंज के 70 घाट पुल को बदनाम कर के रख दिया है जबकि उनको पता ही नहीं है कि जो पुल गिरा है।वह 70 घाट पुल नहीं है।वह पुल 70 घाट पुल से महज 1 किलोमीटर की दूरी पर बैकुंठपुर प्रखंड में खोम्हारीपुर के पास राम जानकी पथ पर बना छोटा सा पुल है जो बाढ़ के पानी के दबाव के चलते पूल का अप्रोच रोड टूट गया।हालांकि जो पुल टूटा ओ भी नहीं टूटना चाहिए था लेकिनन की धार में जैसे पटना के वह हुक्मरानों के दाव आन बान शान जैसे बह गया हो और घोटाले घपले के रेट वाले सीमेंट ईंट में दबकर विलीन हो गया।

 

बिहार सैलाब से बेहाल है कोरोना का काल है और अब पूल सवाल कर रहा है कि इसका जिम्मेदार कौन वह सिस्टम जहां करप्शन का राज है वह अफसर जो पैसे के गुलाम है या वो ठेकेदार जो करारे नोटों के विषाद पर  जिंदगी यों की सौदा करने की हिम्मत करते हैं।शायद इस विकास की लाचारी को भी देख कर सरकार की आंखें खुले।

हैरानी की बात यह है कि इन नेताओं के साथ कुछ बड़े नेशनल मीडिया संस्थान ने भी बिना सत्यता की जांच किए कहानियां बनाने लगे।

गिरने वाले पुल के संदर्भ में जिला प्रशासन ने पहले ही ग्रामीणों को यह जानकारी दे दी थी कि सतर्क रहें।पुल गिरने की खबर आनन फानन में नेताओं तक पहुंचा अब शुरू हुआ असली राजनीति का खेल बड़े बड़े एसी कमरों में बैठकर इन नेताओ ने पटना दिल्ली जैसे शहरों से ट्वीट पर ट्वीट करना शुरू किया और आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ कि सरकार निकम्मी है घोटालेबाज है हम सही है।

पटना में बैठे हुए सारे नेताओं की जैसे लॉटरी लग गई और अपने फेसबुक पेज से ट्यूटर पेज से सोशल मीडिया से इतनी अफवाह फैला दी है कि बेचारा 70 घाट पुल पूरे विश्व में बदनाम हो गया जबकि इन नेताओं को पता ही नहीं है की पूल यह कौन सा है और हम लोग किस पर राजनीति कर रहे हैं । पर इसमें गलत क्या है क्योंकि यही तो राजनीति है ओ कहते है ना को राजनीति में जो दिखता है ओ होता नहीं और जो होता है वह दिखता नहीं हैं। एक बार ये नेता 70 घाट के पुल को देख ले तब उनको पता चले कि पुल टूटा कौन है और वह लोग किस पर राजनीति कर रहे हैं।

FOLLOW US

POPULAR NOW

RELATED